Friday, January 27, 2017

अधूरा सच – Heart Touching Story in Hindi


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 एक 25 वर्ष का लड़का ट्रेन में सफ़र करते वक्त खिड़की से बाहर के नज़ारे को देख रहा था। 
वह अचानक चिल्लाया – “पापा, वो देखो पेड़ पीछे जा रहे है!”
पिताजी मुस्कराए।
पास में बैठा एक व्यक्ति, लड़के के इस बचपने व्यवहार को देखकर हैरान था और उसे लड़के पर दया आ रही थी
थोड़ी देर बाद लड़का फिर ख़ुशी से चिल्लाया – “देखो पापा, बादल हमारे साथ चल रहे है!”
अब पास में बैठे व्यक्ति से रहा नहीं गया और उसने कहा – “आप अपने बेटे को किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते?”
लड़के के पिता ने कहा – “हम अभी अस्पताल से ही आ रहे है दरअसल मेरा बेटा जन्म से ही अँधा था और आज ही उसको आँखे मिली है आज वह पहली बार इस संसार को देख रहा है
( आप यह कहानी महंत नायक ब्लॉग पे पढ़ रहे है। )

Everyone has a thier own story

 हर व्यक्ति की अपनी एक कहानी होती हैसम्पूर्ण सच को जाने बिना किसी के भी व्यवहार के बारे में निर्णय नहीं करना चाहिए ।  हो सकता है कि जो दिख रहा है वह सम्पूर्ण सच न हो

Don’t judge people before you truly know them. The truth might surprise you.Think before you say something.


Wednesday, January 25, 2017

कहानियां जो जिंदगी बदल दे ||Motivational Hindi Story ||


हाथी – Elephant Rope Story

क्या आपको पता है, जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो उसे पतली एंव कमजोर रस्सी से बांधा जाता है| हाथी का बच्चा छोटा एंव कमजोर होने के कारण उस रस्सी को तोड़कर भाग नहीं सकता| लेकिन जब वही हाथी का बच्चा बड़ा और शक्तिशाली हो जाता है तो भी उसे पतली एंव कमजोर रस्सी से ही बाँधा जाता है, जिसे वह आसानी से तोड़ सकता है लेकिन वह उस रस्सी को तोड़ता नहीं है और बंधा रहता है| ऐसा क्यों होता है?
(आप ये कहानी महंत नायक ब्लॉग पे पढ़ रहे है। उम्मीद है आपको हमारा ब्लॉग  होगा। आपके सुझाव हमें जरूर दे।)
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 ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो वह बार-बार रस्सी को छुड़ाकर भागने की कोशिश करता है, लेकिन वह कमजोर होने के कारण उस पतली रस्सी को तोड़ नहीं सकता और आखिरकर यह मान लेता है कि वह कभी भी उस रस्सी को तोड़ नहीं सकता| हाथी का बच्चा बड़ा हो जाने पर भी यही समझता है कि वह उस रस्सी को तोड़ नहीं सकता और वह कोशिश ही नहीं करता| इस प्रकार वह अपनी गलत मान्यता अथवा गलत धारणा (Wrong Beliefs) के कारण एक छोटी सी रस्सी से बंधा रहता है जबकि वह दुनिया के सबसे ताकतवर जानवरों में से एक है|

(इस छोटी सी कहानी हमें बहोत कुछ सिख देती है , बस इस सिख को अपने व्यवहारु जीवन में उतार ने के लिए अपनी भी एक कहानी होनी चाहिए।  )

 

Monday, January 23, 2017

धरती फट रही है ! || OMG..!!

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                बहुत समय पहले की बात है किसी जंगल में एक गधा बरगद के पेड़ के नीचे लेट कर आराम कर रहा था .
 लेटे-लेटे उसके मन में बुरे ख़याल आने लगे , उसने सोचा ,” यदि धरती फट गयी तो मेरा क्या होगा ?” अभी उसने ऐसा सोचा ही था कि उसे एक जोर के धमाके की आवाज़ आयी. वह भयभीत हो उठा और चीखने लगा ” भागो-भागो धरती फट रही है , अपनी जान बचाओ…..”  और ऐसा कहते हुए वह पागलों की तरह एक दिशा में भागने लगा.
 (आप ये कहानी महंत नायक ब्लॉग पे पढ़ रहे है। )
 उसे इस कदर भागता देखते हुए एक अन्य गधे ने उससे पूछा , ” अरे क्या हुआ भाई , तुम इस तरह बदहवास भागे क्यों जा रहे हो ?”

"अरे तुम भी भागो…अपनी जान बचाओ, धरती फट रही है…”, ऐसा चीखते हुए वह भागता रहा .

यह सुन कर दूसरा गधा  भी डर गया और उसके साथ भागने लगा.  अब तो वह दोनों एक साथ चिल्ला रहे थे- ” भागो-भागो धरती फट रही है …भागो-भागो ….”

देखते-देखते सैकड़ों गधे इस बात को दोहराते हुए उसी दिशा में भागने लगे.

गधों को इस तरह भागता देख , अन्य जानवर भी डर गए. धरती फटने की खबर जंगल में लगी आग की तरह फैलने लगी , और जल्द ही सबको पता चल गया की धरती फट रही है. चारो तरफ जानवरों की चीख-पुकार मच गयी , सांप, बिच्छु , सीयार , लोमड , हाथी , घोड़े ..सभी उस झुण्ड में शामिल हो  भागने लगे.

जंगल में फैले इसे हो-हल्ले को सुन अपनी गुफा में विश्राम कर रहा जंगल का रजा शेर बाहर निकला , उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ  कि सारे जानवर एक ही दिशा में भागे जा रहे हैं.वह उछल कर सबके सामने आया और गूंजती हुई दहाड़ के साथ बोला , ” ये क्या पागलपन है ? कहाँ भागे जा रहे हो तुम सब ??”

” महाराज , धरती फट रही है !! , आप भी अपनी जान बचाइए. “, झुण्ड में आगे खड़ा बन्दर बोला.

” किसने कहा ये सब ?” , शेर ने प्रश्न किया


सब  एक दूसरे का मुंह देखने लगे , फिर बन्दर बोला ,” मुझे तो ये बात चीते ने बतायी थी.”

 चीते ने कहा , ” मैंने तो ये पक्षियों से सुना था .” और ऐसे करते करते  पता चला कि ये बात सबसे पहले गधे ने बताई थी.


गधे को महाराज के सामने बुलाया गया .


” तुम्हे कैसे पता चला कि धरती फट रही है ?”, शेर ने गुस्से से पूछा.


“मममम मैंने अपने कानो से धरती के फटने की आवाज़ सुनी महाराज !!”, गधे ने डरते हुए उत्तर दिया


” ठीक है चलो , मुझे उस जगह ले चलो और दिखाओ कि धरती फट रही है.”, ऐसा कहते हुए शेर गधे को उस तरफ ढकेलता हुआ ले जाने लगा. बाकी जानवर भी उनके पीछे हो लिए और डर-डर कर उस और बढ़ने लगे .बरगद के पास पहुच कर गधा बोला ,” हुजूर , मैं यहीं सो रहा था कि तभी जोर से धरती फटने की आवाज़ आई, मैंने खुद उडती हुई धूल देखी और भागने लगा “

शेर ने आस पास जा कर देखा और सारा मामला समझ गया . उसने सभी को संबोधित करते हुए बोला ,”  ये गधा महामूर्ख है , दरअसल पास ही  नारियल का एक ऊँचा पेड़ है , और तेज हवा चलने से उस पर लगा एक बड़ा सा नारियल नीचे पत्थर पर गिर पड़ा , पत्थर सरकने से आस-पास धूल उड़ने लगी और ये गधा ना जाने कैसे इसे धरती फटने की बात समझ बैठा .”


शेर ने बोलना जारी रखा ,” पर भाइयों ये तो गधा है , पर क्या आपके पास भी अपना दिमाग नहीं है , जाइए ,अपने घर जाइये और आइन्दा से किसी अफवाह पर यकीन करने से पहले दस बार सोचियेगा.”


Friends , हमारी Life में भी कई बार ऐसा होता है कि हम किसी अफवाह को सुनते हैं और उसपर यकीन कर बैठते हैं . इन Rumours की चपेट में आकर  हम कई बार ज्यादा पैसों की लालच में अपनी गाढ़ी कमाई भगेडू कंपनियों में लगा देते हैं तो कई मामलों में ये दंगों और भगदड़ के रूप में कई जाने ले लेता है.

इसलिए हमें किसी गधे की बात में यकीन करने से पहले अपना दिमाग ज़रूर लगा लेना चाहिए ,और ये भी समझना चाहिए कि अगर सैकड़ों लोग भी किसी गलत चीज को बढ़ावा दे रहे हैं तो भी वो गलत ही रहती है, और उससे बचने में ही भलाई है.

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Note: The inspirational story shared here is not my original creation, I have read it before and I am just providing a Hindi version of the same.



Wednesday, January 18, 2017

कृष्ण ने राधा से किया था विवाह || Mahant Naik ||


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तो दोस्तों पहले तो हमें राधा जी के जन्म के बारे में जानना होगा.....।
द्धापर युग में माँ लक्ष्मि ने रुक्मणीजी का अवतार लेकर पृथ्वी पर विधर्व देश के राजा भीष्मक के यहाँ पुत्री के रूप में अवतरित हुई थी। अब हुआ ये के रुक्मणी जी जब ३ माह की हुई तब पूतना नाम की राक्षसि उन्हें मारने के लिए राजा भीष्मक के महल में आ गयी थी।  दोस्तों ये पूतना वही राक्षसि थी जिसेने कंस के  कहने पर भगवान् कृष्ण कोअपना जहरीला स्तन-पान  करके मार ने की कोसिस की थी, पर वो राक्षसि श्री कृष्ण को स्तनपान कराने की वजह से मृत्यु को प्राप्त हुई थी।
राक्षसि पूतना ने यही अपने जहरीले स्तनपान देवी रुक्मणी जी को भी कराने की कोशिश थी,लेकिन उसी समय अचानक कुछ महल के सैनिको को आता देख राक्षसि पूतना देवी रुक्मणी को लेकर आकाश में उड़ गयी थी , लोको ने अब यह मान लिया की राजा भीष्मक पुत्री राजकुमारी  रुक्मणी की मुत्यु हो गयी....
                                        ( आप ये स्टोरी महंत नायक ब्लॉग पे पढ़ रहे है। )
जब की यहाँ राक्षसि पूतना देवी को लेकर बहोत ऊपर उड़ रही थी तब देवी किसी तरह पूतना से अपने आप को आज़ाद कराने में सफल रही। और आकाश से गिरते वक्त पृथ्वी पर एक सरोवर में कमल के फूल के ऊपर विराजमान हो गयी थी।  यह सरोवर मथुरा  नगरी के एक छोटे से बरसाना गाव में था और तभी वह से बरसाना गाव के एक व्यकि ब्रिसवान और उनकी पत्नी कृतीदेवी वहां से गुजर रहे है , उसी समय उन्होंने कमल के फूल पर बिराजमान देवी को देखा।
वो निःसंतान होने की वजह से उस कन्या को खुल पालन पोषण  की ज़िम्मेदारी ली और अपनी पुत्री का नाम "राधा "रख देते है।

दोस्तों आप राधा जी और कृष्णा जी के अटूट प्रेम के बारे में तो जानते ही है।
जब कृष्णा माथुरा नगरी छोड़के द्धारिका नगरी चले गए। और यहाँ विधर्व देश के राजा भीष्मक को ये सुचना मिली की उनकी पुत्री जीवित है और राजा राधा जी को लेकर विधर्व देश वापस लोट गए।
जब की विधर्व देश कृष्ण को अपना दुश्मन मानते थे इस लिए वो राधा जी का विवाह कही और करना चाहते थे।
 इस लिए भगवान  कृष्णा ने देवी रुक्मणी जी जो की राधा भी थी उनका अपहरण करने अपनी पत्नी बनाया।

दोस्तों इस कहानी को पढ़ कर आप समाज ही गए होंगे  रुक्मणीजी एक ही थी।  तो जब कृष्णा जी ने रुक्मणी जी के साथ विवाह किया तो वो राधा जी के साथ विवाह कैसे करते?
इसी लिए हमारे पुराणों में भी राधा जी का नाम आता है तब तक  रुक्मणी जी का नहीं आता और जब भगवन कृष्ण ने   रुक्मणी जी से विवाह किया उसके पश्चात राधा जी का  नाम नहीं आता ।

इसी तरह हमारे पुराणों , महाभारत और रामायण में ऐसी कई  रसस्य से भरे तथ्य छुपे है जो हमे  चौका देते है।

अगर आपको ये कहानी पसंद आये तो LIKE - SHARE OR COMMENT जरूर करे।
या आप मुझे ईमेल कर सकते है mahantnayak@gmail.com अगर आप चाहे तो इसी तरह के और रहस्य में आपके सामने ला सकता हु।

||  Thank You ||


Friday, January 13, 2017

|| बदलाव || Short Motivational Story in Hindi

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जिन्दगी में बहुत सारे अवसर ऐसे आते है जब हम बुरे हालात का सामना कर रहे होते है और सोचते है कि क्या किया जा सकता है क्योंकि इतनी जल्दी तो सब कुछ बदलना संभव नहीं है और क्या पता मेरा ये छोटा सा बदलाव कुछ क्रांति लेकर आएगा या नहीं लेकिन मैं आपको बता दूँ हर चीज़ या बदलाव की शुरुआत बहुत ही basic ढंग से होती है | कई बार तो सफलता हमसे बस थोड़े ही कदम दूर होती है कि हम हार मान लेते है जबकि अपनी क्षमताओं पर भरोसा रख कर किया जाने वाला कोई भी बदलाव छोटा नहीं होता और वो हमारी जिन्दगी में एक नीव का पत्थर भी साबित हो सकता है | चलिए एक कहानी पढ़ते है इसके द्वारा समझने में आसानी होगी कि छोटा बदलाव किस कदर महत्वपूर्ण है |
           एक लड़का सुबह सुबह दौड़ने को जाया करता था | आते जाते वो एक बूढी महिला को देखता था | वो बूढी महिला तालाब के किनारे छोटे छोटे कछुवों की पीठ को साफ़ किया करती थी | एक दिन उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची |
 (आप ये कहानी महंत नायक ब्लॉग पे पढ़ रहे है । )
वो लड़का महिला के पास गया और उनका अभिवादन कर बोला ” नमस्ते आंटी ! मैं आपको हमेशा इन कछुवों की पीठ को साफ़ करते हुए देखता हूँ आप ऐसा किस वजह से करते हो ?”  महिला ने उस मासूम से लड़के को देखा और  इस पर लड़के को जवाब दिया ” मैं हर रविवार यंहा आती हूँ और इन छोटे छोटे कछुवों की पीठ साफ़ करते हुए सुख शांति का अनुभव लेती हूँ |”  क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचता जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए ये कछुवे तैरने में मुश्किल का सामना करते है | कुछ समय बाद तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते है इसलिए कवच को साफ़ करती हूँ |

यह सुनकर लड़का बड़ा हैरान था | उसने फिर एक जाना पहचाना सा सवाल किया और बोला “बेशक आप बहुत अच्छा काम कर रहे है लेकिन फिर भी आंटी एक बात सोचिये कि इन जैसे कितने कछुवे है जो इनसे भी बुरी हालत में है जबकि आप सभी के लिए ये नहीं कर सकते तो उनका क्या क्योंकि आपके अकेले के बदलने से तो कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा न |

महिला ने बड़ा ही संक्षिप्त लेकिन असरदार जवाब दिया कि भले ही मेरे इस कर्म से दुनिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा लेकिन सोचो इस एक कछुवे की जिन्दगी में तो बदल्वाव आयेगा ही न | तो क्यों हम छोटे बदलाव से ही शुरुआत करें |

आपको ये कहानी पसंद आये तो हमें Mahantnayak@gmail.com  या हमारे फेसबुक अकाउंट Admin Facebook Mahant Naik पे कह सकते है ।  

Wednesday, January 11, 2017

અને તે લૂંટારાએ કહ્યું કે, મને તારી રૂપવાન પત્ની અને પાણીદાર ઘોડી આપ || Unbelievable Story ||

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       જેસલ-તોરલની કથા બહુ જાણીતી છે. કચ્છની ધરતીનો કાળો નાગ એટલે જેસલ જાડેજા અને સતી તોરલની  લોક કથા આજે પણ એટલી જ લોકપ્રિય છે. આ લોકકથા પરથી એક ફિલ્મ પણ બની હતી જેને લોકોએ ખુબ વખાણી હતી.
આ લોકકથા છે 14મી સદીના મધ્ય સમયની. તેનું નામ હતું જેસલ. તે એક  પ્રબળ પરાક્રમીને શક્તિશાળી લૂંટારો હતો. ગમે તે કારણે કે અકારણે લોકોને રહેંસી નાખવા એ તેને મન રમત વાત હતી. પરાક્રમના અભિમાને, વિજયના કેફમાં તે ઉત્તરોત્તર બેફામ બનતો જતો હતો.

જેસલની ઈચ્‍છાનો કોઇ  અંત નહોતો. જે ગમી જાય તે ઝૂંટવીને લેવાની આદત પડી ગઇ હતી. ને એક વાર તેને ગમી ગઈ કાઠિયાવાડના સલડી ગામના સુપ્રસિદ્ધ કાઠી ભગત સાંસતિયાજીની પાણીદાર ઘોડી ‘તોરી‘ ને તે સાથે જ તેણે જેની ખૂબ પ્રશંસા સાંભળી હતી તે સાંસતિયાજીની અનુપમ રૂપવાન પત્‍ની તોરલ ! જેસલની દાઢ સળકી, ને ગમતાને ઘેર લાવવા તે વિવશ બન્‍યો.

એક રાત્રે...... સાંસતિયાજીને ઘેર જાગ હતો. ભક્તમંડળ ભજનપૂજનમાં મગ્‍ન હતું ત્‍યારે જેસલ છુપાઈને સાંસતિયાજીની ઘોડારમાં પહોંચ્‍યો. અંધારામાં અજાણ્યા આદમીના આગમનથી જાતવાન ઘોડી ચમકી ને જમીનમાંથી ખીલો ખેંચીને ખીલા સહિત ભાગી ગઈ ભગત પાસે.

તો સાંસતિયાજીનો રાવત વ્‍યાકુળ ઘોડીને શાંત પાડીને પાછો ઘોડારમાં દોરી લાવ્‍યો ને ખીલો પાછો જમીનમાં ખોડવા લાગ્‍યો, ત્‍યાં અચાનક અજાણતાં ખીલો ખોડાઈ ગયો ઘાસમાં છુપાઈ રહેલા જેસલના હાથ પર ને જેસલ જડાઈ ગયો જમીન સાથે. પણ નામર્દ દેખાવાના ડરે તેણે ન પાડી ચીસ કે ન કર્યો ચિત્‍કાર. ભયંકર વેદના સહન કરતો તે ત્‍યાં જ પડ્યો રહ્યો.

સાંસતિયાજીની પૂજા પૂરી થઈ. પ્રસાદ વહેંચાયો. પણ થોડો વધ્‍યો. આશ્ચર્ય, કારણ કે એ સ્‍થાનકનો પ્રભાવ જ એવો હતો – વગર માપે કરેલો પ્રસાદ પણ સૌને બરાબર વહેંચાઈ રહે. હાજર હોય એ સૌને પહોંચે. ન ઘટે કે ન વધે. તો આ વધ્‍યો કોના ભાગનો ? ત્‍યાં ઘોડારમાંથી ઘોડીના ધમપછાડા સાંભળી સાંસતિયાજી ઘોડારમાં ગયા. તેમણે જમીન સાથે જકડાયેલા જેસલને જોયો. તેની સહનશક્તિથી તે છક થઈ ગયા. તેને ત્‍યાંથી મુક્ત કર્યો ને સાંસતિયાજી અને તોરલે તેની સરભરા કરી.

પણ જેસલ જેનું નામ. સવાર થયે ઇચ્‍છા વ્‍યક્ત કરી તોરી ઘોડી અને તોરલને લઈ જવાની. સૌને આઘાત લાગ્‍યો, પરંતુ સાંસતિયા તો સાચો સંત. તેના ભકત હ્રદયે શરત મૂકી : જેસલ ભક્તિમાર્ગે વળે તો તેની માગણી તે પૂરી કરશે. જેસલે ઇચ્‍છાના અનિરુદ્ધ દબાણને વશ થઈ તે શરત સ્‍વીકારી. સંતે વચન પાળ્યું ને ઘોડી અને પત્‍નીને આપીને જુલમી ભારાડી જેસલને ભક્તિમાર્ગે વાળવાનો અને ઉદ્ધારવાનો ઈલમ કર્યો. ને જેસલ-તોરલ રાણીને લઈને ચાલી નીકળ્યો.

પણ સંતની નિષ્‍કામ ઉદારતા દીઠી તેમ સતીનો પરચો બાકી હતો. કચ્‍છથી કાઠિયાવાડ આવતાં સમુદ્રની ખાડી ઓળંગવી પડે. જેસલ-તોરલ વહાણમાં ચઢ્યાં. પણ મધદરિયે પ્રચંડ વંટોળ ઊઠ્યો. વિનાશક વાવાઝોડું ફૂંકાયું. વહાણ પ્રચંડ મોજાં પર ફંગોળાવા લાગ્‍યું અને ડૂબું ડૂબું થઈ ગયું. ચોપાસથી ભીંસાતાં મૃત્‍યુ આંખ સામે દેખાતાં ભડ જેસલ પણ ભયભીત થઈ ભાંગી પડ્યો.

સતી તોરલે આ પારખ્‍યું અને જીવન-મૃત્‍યુ વચ્‍ચેની નાજુક ક્ષણે એણે જેસલને જીવનનું રહસ્‍ય સમજાવ્‍યું. સતનો મારગ ચીંધ્યો. જેસલનો હ્રદય-પલટો થયો. વાસના-વ્‍યાકુળ અને સંહારક લૂંટારો સતધર્મી ને સંત બની ગયો. સતીના શબ્દે પ્રગાટાવેલી જ્યોતાના તેજમાં તેણે તલવાર મૂકી એકતારો ઉઠાવ્‍યો ! ‘પાપ તારું પરકાશ જાડેજા....‘ અને ‘જેસલ કરી લે વિચાર‘ જેવાં સુપ્રસિદ્ધ લોકગીતમાં આ કથાને તોરલની જ્ઞાનવાણી અમરત્‍વ પામી છે ને ભજનિકોને કંઠે ઘેર ઘેર ગુંજી રહી છે.

‘.......તારી બેડલીને બૂડવા નહીં દઉં.....જાડેજા રે.....‘  
( વાચકો આ લેખ લોકકથા દ્વારા લેવા મા આવ્યો છે, મહંત નાયક બ્લોગ સાથે કોઇ સમ્બંધ નથી.)


Tuesday, January 10, 2017

बुलंद होसलों की कहानी || best motivational story in hindi ||


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        मुसीबते हमारी ज़िंदगी की एक सच्चाई है। कोई इस बात को समझ लेता है तो कोई पूरी ज़िंदगी इसका रोना रोता है। ज़िंदगी के हर मोड़ पर हमारा सामना मुसीबतों(problems) से होता है. इसके बिना ज़िंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती।
अक्सर हमारे सामने मुसीबते आती है तो तो हम उनके सामने पस्त हो जाते है। उस समय हमे कुछ समझ नहीं आता की क्या सही है और क्या गलत। हर व्यक्ति का परिस्थितियो को देखने का नज़रिया अलग अलग होता है। कई बार हमारी ज़िंदगी मे मुसीबतों का पहाड़ टूट पढ़ता है। उस कठिन समय मे कुछ लोग टूट जाते है तो कुछ संभाल जाते है।
मनोविज्ञान के अनुसार इंसान किसी भी problem को दो तरीको से देखता है;
1 problem पर focus करके(problem focus peoples)
2 solution पर focus करके(solution focus peoples)
Problem focus peoples अक्सर मुसीबतों मे ढेर हो जाते है। इस तरीके के इंसान किसी भी मुसीबत मे उसके हल के बजाये उस मुसीबत के बारे मे ज्यादा सोचते है। वही दूसरी ओर solution focus peoples मुसीबतों मे उसके हल के बारे मे ज्यादा सोचते है। इस तरह के इंसान मुसीबतों का डट के सामना करते है।

दोस्तो आज मै आपके साथ एक महान solution focus इंसान की कहानी शेयर करने जा रहा हु जो आपको किसी भी मुसीबत से लड़ने के लिए प्रोत्साहित (motivate) करेगी। दोस्तो आपने नेपोलियन बोनापार्ट (napoleon Bonaparte) का नाम तो सुना ही होगा। जी हा वही नापोलियन बोनापार्ट जो फ़्रांस के एक महान निडर और साहसी शासक थे जिनके जीवन मे असंभव नाम का कोई शब्द नहीं था। इतिहास में नेपोलियन को विश्व के सबसे महान और अजय सेनापतियों में से एक गिना जाता है। वह इतिहास के सबसे महान विजेताओं में से माने जाते थे । उसके सामने कोई रुक नहीं पाता था।
 
 नेपोलियन के बुलंद होसलों की कहानी- a motivational story
नेपोलियन अक्सर जोखिम (risky) भरे काम किया करते थे। एक बार उन्होने आलपास पर्वत को पार करने का ऐलान किया और अपनी सेना के साथ चल पढे। सामने एक विशाल और गगनचुम्बी पहाड़ खड़ा था जिसपर चढ़ाई करने असंभव था। उसकी सेना मे अचानक हलचल की स्थिति पैदा हो गई। फिर भी उसने अपनी सेना को चढ़ाई का आदेश दिया। पास मे ही एक बुजुर्ग औरत खड़ी थी। उसने जैसे ही यह सुना वो उसके पास आकर बोले की क्यो मरना चाहते हो। यहा जितने भी लोग आये है वो मुह की खाकर यही रहे गये। अगर अपनी ज़िंदगी से प्यार है तो वापिस चले जाओ। उस औरत की यह बात सुनकर नेपोलियन नाराज़ होने की बजाये प्रेरित हो गया और झट से हीरो का हार उतारकर उस बुजुर्ग महिला को पहना दिया और फिर बोले; आपने मेरा उत्साह दोगुना कर दिया और मुझे प्रेरित किया है। लेकिन अगर मै जिंदा बचा तो आप मेरी जय-जयकार करना। उस औरत ने नेपोलियन की बात सुनकर कहा- तुम पहले इंसान हो जो मेरी बात सुनकर हताश और निराश नहीं हुए। ‘ जो करने या मरने ‘ और मुसीबतों का सामना करने का इरादा रखते है, वह लोग कभी नही हारते।
आज सचिन तेंदुलकर (sachin tendulkar) को इसलिए क्रिकेट (cricket) का भगवान कहा जाता है क्योकि उन्होने जरूरत के समय ही अपना शानदार खेल दिखाया और भारतीय टीम को मुसीबतों से उभारा। ऐसा नहीं है कि यह मुसीबते हम जैसे लोगो के सामने ही आती है, भगवान राम के सामने भी मुसीबते आयी है। विवाह के बाद, वनवास की मुसीबत। उन्होने सभी मुसीबतों का सामना आदर्श तरीके से किया। तभी वो मर्यादा पुरषोतम कहलाये जाते है। मुसीबते ही हमें आदर्श बनाती है।

अंत मे एक बात हमेशा याद रखिये;
जिंदगी में मुसीबते चाय के कप में जमी मलाई की तरह है,
और कामयाब वो लोग हैं जिन्हेप फूँक मार के मलाई को साइड कर चाय पीना आता है
अगर आपको यह article उपयोगी लगा हो तो कृपया इसे अपने दोस्तो के साथ शेयर कीजिये। आप अपनी राय, सुझाव या विचार हमे Mahantnayak@gmail.com के माध्यम से भेज सकते है.
-महंत नायक 

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सबसे सच्चा रिश्ता “दोस्ती” - mahant naik

सबसे सच्चा रिश्ता “दोस्ती” “दोस्त वह होता है जो आपके भुतकाल को समझता है। आपके भविष्य पर विश्वास रखता है और आप जैसे हो ...