Friday, September 1, 2017

विकलांगता से IAS Topper तक की कहानी – Ira Singhal Success Story In Hindi

 IAS Topper Success Story in Hindi

IAS – UPSC Civil Services Exams! इसकी प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि हर वर्ष लाखों विद्यार्थी IAS Officer बनने के लिए यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा देते है, लेकिन मुश्किल से .025% विद्यार्थी ही IAS Officer बन पाते है|
Civil Services Exams की Final Success Rate सामान्यत: .30% के करीब होती है जिसमें से भी सबसे प्रतिष्ठित Indian Administrative Services की Success Rate सामान्यत: .025% से भी कम होती है|
लेकिन जिनके हौसले बुलंद होते है, वे मुश्किलों से डरते नहीं और सफलता को उनके आगे झुकना ही पड़ता|
UPSC Civil Services Exam 2014 के नतीजे कुछ खास रहे क्योंकि पहले 4 स्थानों पर लड़कियों ने बाजी मारी और उसमें से भी पहले स्थान पर एक ऐसी लड़की सफल हुई, जिसका 60% शरीर विकलांग है|
(आप यह कहानी महंत नायक ब्लागस्पाट पे पढ़ रहे है। )

Ira Singhal ने UPSC Civil Service Exams 2014 में सर्वोच्च स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया है कि मेहनत और बुलंद हौसलों के आगे विकलांगता बहुत कमजोर है|
इरा सिंघल को अपनी विकलांगता के कारण कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी|
इरा सिंघल ने 2010 में ही सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी और वे Indian Revenue Service – IRS पद पर नियुक्ति की हकदार थी लेकिन शारीरिक रूप से विकलांग होने के कारण डिपार्टमेंट ने उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी| लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और उन्होंने Central Administrative Tribunal (CAT)  में मामला दर्ज कराया |
CAT का फैसला IRA Singhal के पक्ष में आया और उन्हें Assistant Commissioner of Customs and Central Excise Service (IRS) पर नियुक्त किया गया|
कई मुसीबतों के बावजूद इरा सिंघल ने प्रयास जारी रख और फिर से सिविल सेवा की परीक्षा दी| उन्होंने 2014 Civil Service Exam में Top कर, फिर से यह साबित कर दिया कि भले ही वे शारीरिक रूप से थोड़ी कमजोर है लेकिन मानसिक रूप से वे बेहद शक्तिशाली है|
इरा सिंघल महिलाओं, बच्चों और शारीरिक रूप से असक्षम लोगों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहती है|
आज हमें इरा सिंघल जैसे लोगों पर गर्व होता है, क्योंकि ऐसे लोग हर बार यह साबित कर देते है कि – नामुनकिन कुछ भी नहीं – Nothing is Impossible| Ira Singhal ने यह साबित किया है कि उनके बुलंद हौसलों के आगे मुसीबतें और विकलांगता बहुत कमजोर है|

 



Thursday, May 4, 2017

प्रेम और प्यार में फर्क -Difference between Prem and Pyar

 



वैसे ‘प्रेम’ और ‘प्यार’ दोनों शब्दों में कोई बुनियादी फर्क नहीं है और न ही दोनों में परस्पर कोई विरोधभास है लेकिन फिर भी अगर आप real life में देखें तो दोनों शब्दों के एक बड़ा व्यवहारिक फर्क आप देख सकते है |  आप देखें व्याकरण ने या ना ही भाषा ने दोनों शब्दों में कोई दुविधा पैदा की है और न ही दोनों में से किसी एक के साथ भेदभाव किया है |वो हम है जिन्होंने एक बड़ा योगदान दिया है ‘प्यार’ जैसे शब्द के साथ भ्रम को विकसित करने में |

असल में हमने ‘प्रेम’ को हमेशा एक स्वच्छ और निष्काम भाव के साथ सोचा है और हमारे दिमागी ढांचे में हमने इसी तरह इसे फिट किया है जिस तरीके से हम अगर किसी अध्यात्मिक शिविर या सत्संग में उपस्थिति होते है और किसी के प्रवचन को सुनकर खुद को परमात्मा के साथ जोड़ते है ठीक वैसा ही भाव हम ‘प्रेम’ शब्द के विषय में रखते है फिर चाहे हम इसे कंही भी इस्तेमाल करें | हमारे माता पिता के साथ हमारा ‘प्रेम’ भाई बहन के साथ हमारा ‘प्रेम’  या फिर कुछ और आत्मीयता के ही ऐसे उदाहरण | हम बड़े मैत्रीपूर्ण ढंग से प्रेम शब्द के इस्तेमाल के साथ खुद को सहज महसूस करते है |

जबकि अगर हम ‘प्यार’ शब्द की बात करते है तो इसके साथ ऐसा सौतेला व्यवहार करते है जैसे कि बस यह नयी पीढ़ी के पतन को ही परिभाषित करता हो जबकि ऐसा नहीं है हम अपने खून के रिश्तों या यूँ कहे by default जो रिश्ते बने है उनके के लिए इस्तेमाल नहीं करते लेकिन शायद जब हम अपने किसी साथी के लिए जिसे हम पसंद करते है उसके लिए ‘प्यार’ शब्द का इस्तेमाल करते है तो लोगो के लिए इसके मायने बदल जाते है वो कुछ इस तरह पेश आते है जैसे किसी अच्छे से धार्मिक नाम वाले बन्दे ने कुछ बहुत सारे बुरे काम करके अपनी छवि खराब कर ली हो और हम समाज में बस महज उसे एक बुरे चरित्र का इन्सान मानते है शायद ये इसलिए भी है कि अख़बारों में हम हमेशा पढने में पाते है कि “फलानी जगह आज दो प्यार करने वालों ने आत्महत्या की ” या “प्यार में किसी ने जान दे दी ” तो ऐसे ही कुछ उदाहरण एक नजरिया विकसित करते है और जब देखने में हम पाते है तो ऐसे लगता है जैसे ‘प्यार’ शब्द हो सकता है कुछ आशंकित बुरे परिणामो को जाहिर करता हो जबकि ऐसा नहीं है |

‘प्यार’ या ‘प्रेम’ जैसे अर्थपूर्ण शब्द दूजे नहीं है | ये जैसे सहोदर है |दोनों शब्दों में कतई कोई फर्क नहीं है फर्क केवल वो है जो हमने बदलते परिवेश के साथ खुद के दिमाग में विकसित कर लिया है और ये कोई विकास का उदाहरण नहीं है | बस एक मानसिक विकृति से मिलता जुलता है |

Saturday, April 1, 2017

झूट और सच || Motivational Story ||

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किसी गाँव में मित्र शर्मा नामक एक ब्राह्मण रहता था । एक बार वह अपने यजमान से एक बकरा दान में पाकर अपने घर को जा रहा था रास्ता लम्बा और सुनसान था । थोड़ी दूर आगे जाने पर रास्ते में उसे तीन ठग मिले । ब्राह्मण के कंधे पर बकरे को देखकर तीनो ने उसे हथियाने की योजना बना ली ।
 
तीनो अलग अलग हो गये । सबसे पहले एक ठग ने पंडित के पास से गुजरते हुए पंडित जी से कहा पंडित जी ये कंधे पर उठाकर क्या लेके जा रहे हो । यह क्या अनर्थ कर रहे हो ब्राह्मण होकर एक कुत्ते को अपने कंधो पर उठा रखा है आपने । पंडित ने झिडकते हुए  जवाब दिया ” कुछ भी अनाप शनाप बोल रहे हो अंधे हो गये हो क्या ये बकरा है तुम्हे दिखाई नहीं देता ?” इस पर ठग ने बनावटी चेहरा बनाते हुए जवाब दिया कि  मेरा क्या जाता है मेरा काम आपको बताना था आगे आपकी मर्ज़ी । अगर आपको कुत्ता ही अपने कंधो पर लेके जाना है तो मुझे क्या ? अपना काम आप जानो । यह कहकर वह निकल गया ।
थोड़ी दूर चलने के बाद ब्राह्मण को दूसरा ठग मिला । उसने ब्राह्मण से कहा ” पंडित जी क्या आप नहीं जानते उच्च कुल के लोगो को अपने कंधो पर कुता नहीं लादना चाहिए ।”  पंडित ने उसे भी झिड़का और आगे बढ़ गया ।

इस पर थोड़ी दूर और आगे जाने के बाद पंडित से तीसरा ठग मिला और उसने पंडित से कुत्ते को पीठ पर लादे जाने का कारण पूछा तो पंडित के मन में आया कि हो न हो मेरी आंखे धोका खा रही है इतने लोग झूट नहीं बोल सकते लगता है कि ये कुत्ता ही है और उसने रास्ते में थोडा आगे जाकर बकरे को अपने कंधे से उतार दिया और घर को चला गया ।
तीनो ठगों ने बकरे को मारकर खूब दावत उडाई ।

 इसलिए कहा गया है " बार बार झूट को भी मेजोरिटी में बोलने पर वह सच जैसा जान पड़ता है और लोग धोखे का शिकार हो जाते है । "

Monday, March 6, 2017

रिश्वत || सब से बड़ी पहचान || By Mahant Naik

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बस में छूट जाने के कारण, पुलिस ने उसका सामान, अपने कब्ज़े में ले लिया था। अब, किसी परिचित आदमी की ज़मानत के बाद ही, वह सामान उसे मिल सकता था।

“मेरी पत्नी सख़्त बीमार है। मेरा जल्दी घर पहुंचना बहुत ज़रूरी है होल्दार सा’ब !” उसने विनती की।

“भई, कह तो दिया, किसी जानकार आदमी को ढूंढकर ले आओ और ले जाओ अपना सामान।”

“मैं तो परदेसी आदमी हूं। सा’ब, दो सौ मील दूर के शहर में कौन मिलेगा मुझे जानने वाला !”

“यह हम नहीं जानते। देखो, यह तो कानूनी ख़ाना-पूर्ति है। बिना ख़ाना-पूर्ति किये हम सामान तुम्हें कैसे दे सकते हैं ?”

वह समझ नहीं पा रहा था कि ख़ाना-पूर्ति कैसे हो ।

कुछ सोचकर, उसने दस रुपये का नोट निकाला और चुपके-से, कॉन्स्टेबुल की ओर बढा दिया। नोट को जेब में खिसकाकर, उसे हल्की-सी डांट पिलाते हुए, कॉन्स्टेबुल ने कहा- “तुम शरीफ़ आदमी दिखते हो, इसलिए सामान ले जाने देता हूं। पर फिर ऐसी ग़लती मत करना, समझे !”

दस के नोट ने, कॉन्स्टेबुल को ही, परिचित बना दिया था।

अगर आपको मेरी कहानी पसंद आये तो मुझे Email कर सकते है mahantnayak@gmail.com या मेरे फेसबुक से जुड़ सकते है। Admin Facebook || Click Here ||

Monday, February 27, 2017

ममता की कोई सिमा नहीं होती || Emotional Sort Story ||

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गुजरात की एक पालिका की शाळा में गौरी नाम की एक लड़की पढाई करती थी। 
वो स्कूल से दिया हुआ कभी होमवर्क नहीं  लाती थी। इसी कारण से उसे रोज सजा मिलती। 
और वो हर रोज फूट फूट कर रो पड़ती।
यही सिलसिला करीब ६ महीनो तक चला। 
अब एक दिन हुआ ऐसा की गौरी पहली बार उसे दिया हुआ होमवर्क करके लायी थी। 
जब ये बात उसके शिक्षक को पता चली वो वह आश्चर्य में ही रह गए ! 
 तब उसे पूछा गया की आज अचानक होमवर्क कैसे लायी हो ?
तब गौरी ने रोते रोते  जवाब दिया की " गुरूजी , आज मेरी माँ की मौत हो गयी है, अब मेरे पास होमवर्क करने का समय है। में मेरी बीमार  माँ की सेवा करती थी इस लिए आज तक होमवर्क करने का समय नहीं मिलता था। "

यह सुन कर पूरा क्लास रो पड़ा।


Sunday, February 26, 2017

माँ बाप से दुश्मनी || Heart Touching Story ||

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हमारे लिए इस दुनिया में सब से पहले हमारे माँ- बाप महत्त्व रखते है। बल्कि में तो ये कहता हू की हमारे माता पिता ही हमारी दुनिया है।
इसी मौके पे मेरी कवियत्री मित्र " खुशबु सिंह " द्वारा लिखी गयी कविता आपके सामने प्रस्तुत करता हू ।
 पापा ओ पापा मेरे लगते कितने प्यारे हो
जग से तुम तो न्यारे हो
दादी के दुलारे पापा
तेरी गुड़िया रानी हूं मैं सब गुड़ियों से प्यारी हूं मेरे नखरे सहते तुम हो मां को भी समझाते हो जब भी गलती करती हूं
डांट भी तुम लगाते हो
मैं जब रोने लगती हूं
चॉकलेट से फुसलाते हो
मम्मा की क्या बात करूं वो तो भोली भाली है पापा की दुलारी मां मेरी प्यारी सुंदर मां मंगल सिंह का नाम लेकर
खाना मुझे खिलाती मां
आइसक्रीम का लालच देकर
पढ़ने को तूं भेजती माँ
मैं जब रूठ जाती हूं कार्टून तू दिखाती मां बात-बात पर किस्सू करती प्यार से मुझे मनाती मां मां पापा मेरे अनमोल ईश्वर के परछाई हैं मेरे जीवन दाता वो.
 आज की जनरेशन  अपने माँ बाप के साथ आपसी मेल जोल बढ़ाने में असफल रहते है।  यही मुख्या कारण है 
दो पीढ़ी के बिच में आने वाली गेप। टेक्नोलॉजी के मुद्दे में नयी जनरेशन बहोत आगे है, लेकिन  इसका मतलब ये नहीं की आप बेहतर हो। क्यों वो टेक्नोलॉजी आपके पहले के जनरेशन ने की आविष्कार किया है। 

में इसी बात का एक बहोत ही उत्तम उदाहरण आप को देता हु -
     " आप एक आम के छोटे पौधे को ज़मीन में लगाइये , और एक बार लगाने के बाद उस के ऊपर बिलकुल भी ध्यान मत दीजिए। 
अब सोचिये उस पौधे का क्या हुआ होगा
जी हाँ,वो मुर्ज़ा के मर गया होगा। 
 वो आम का पोधे को समय समय पर पानी ,खात और जातन करने पर वह बड़ा हो कर तंदुरस्त और फैल देगा। "

अगर आपके मन में यह सवाल आता है की आपके माँ - बाप ने आपके लिए क्या किया है तो उस आम के पौधे की जगह खुद को रखके देखिये। 
" माँ एक कवच है तो पिता आप की ढाल है। "

एक वक्त एसा भी आता है जब हमें कुछ बातो पे रोकना टोकना पसंद नहीं आता ,और उसी वजह से हमें तो हमारे दुश्मन जैसे लगने लगते है।  हमें ऐसा महसूस होता है मानो वो हमसे हमारी आज़ादी छीन रहे हो। 
पर "मेरे दोस्त वो ज़ंज़ीर भी हमारी भलाई के लिए ही बांधी जाती है। "

आज तुम जो कुछ भी हो उनकी बदौलत हो ,तुम "क़ाबिल " हो किसकी वजह से ? भूल गए अपने माबाप की कुर्बानी जो तुम्हारी छोटी छोटी जरुरत को पूरा करने के लिए अपनी ख्वाहिशे   सके। वो इस लिए की तुम्हे कोई तकलीफ  न हो। 
माँ बाप ने हमारे लिए इतना कुछ किया ,न कभी तुमसे वेतन माँगा ना ही तुम्हे किसी और चीज़ की उम्मीद की। 

तो क्या अब तुम्हारा फ़र्ज़ नहीं बनता की तुम्हे जिसने इस काबिल बनाया की तुम सर उठाके के इस दुनिया में जी सको उसके बुढापे का सहारा बनो।  उन बूढ़े हाथो की लकडी बनो। पूरी ज़िन्दगी काम कर के थके उस खाली जिस्म को आराम दे सको,माँ की छाती से पिए हुई दूध का क़र्ज़ उतार सको  

क्या तुम इतना नहीं कर सकते ? तो धिक्कार है तुम पर।  


स्मार्ट सिटी नही हमे सेंसिबल सिटी चाहिए || Emotional Story ||

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आज कल सब को स्मार्ट चिज़े चाहिए  स्मार्टफोन, स्मार्टविल्लेज, स्मार्टकार, स्मार्टटेक इत्यादि इत्यादि ...
“आज फोन स्मार्ट हो गया ओर इंसान गधा ।“

उपर लिखे गये एक वाक्या को आप पढ तो बहोत आसानी से लेंगे लेकिन आप इसे अपने जिवन मे कभी उतार नही पायेंगे क्यूकि हमे अब इन चिज़ो कि आदत पद चुकी है। हम फोन को नही फोन हमे इस्तमाल कर रहे है।

  •  एसा क्यू ? 
  •   आप ने कभी सोचा है ?

अब बात करते है, स्मार्ट सिटी या  स्मार्ट विल्लेज कि...

पिछले हफ्ते ही मेंने एक हरकत देखी,जरा ध्यानसे पढीएगा “ एक लडकी थी पूजा (नाम काल्पनिक है) । 10वी क्लास मे पढ्नेवाली नाबालिग लडकी जो रविवारको अपने ट्यूशन क्लासेस जा रही थी। पूज़ा के ट्युशन का रास्ता एक मर्केटसे हो कर गुज़रता है, जब उस दिन वह उस रास्तेसे जा रही थी थी तो कुछ आवारा लडको की नज़र पूजा पर पडी,वो उसका पिछा करने लगे । जब वो मर्कट के रास्ते तक पहोच चुकी  थी,उन लडकोकि हिम्मत इतनी बढ गयी कि उन्होने पूजा  का हाथ पकड लिया,उसे सरेआम छेडने लगे,उसकी छती से दुप्पट्टा तक खिच लिया गया । अब तो हद हो चूकी थी।

“इस नज़ारे को देखने के बाद मुझे ये समज़ मे आ गया की ह्मारे आस-पास की भिड सिर्फ दिखावेके लिये है,क्या कोइ मर्द नहि था उस मासूम कि इज्जत बचाने के लिये?

अरे मेरा भारत तो विरोकि भूमि की भूमि कहलाता है यहा कि मिट्टी ने “शिवाजिराजे” , “महाराणा प्रताप” , “क्रिश्ण” ,“राम”, “भगतसिह” ओर ना जाने कितने विरोको जन्म दिया है,जिन के नाम तक हमे नहि मालूम पर वो हमारे लिये अपने जिवन का बलिदान दे दिया ।

अब आप कहेंगे उन विरो को ह्मने कहा था अपनी जान देनेके लिये?

तो इसका जवाब है “नही-वो सब पागल थे, जि हाँ वो सब पागल थे, क्यु कि वो तेर- मेरा करने मे नहि समझते थे, वो आपका परिवार हो या मेरा वो सब को अपना मांनते थे । ओर हाँ मुझे गर्व है उन सब पगलो पर । “

कास उस दिन इतनी भिडमे एक तो अवाज उस मासूम लडकी के सपोर्ट मे उठती...

क्या हमे एसी ही स्माटसिटी चाहिए?  सोचिए ....

“ कोइ नेता कहेगा मे ये कर दुंगा वो कर दुंगा,स्मार्ट सिटी लाउंगा, पानी खाना दुंगा,रोज़गारी दुंगा वगेरा वगेरा... “ पर क्या वो नेता उस लडकी कि खोयी हुइ इज्जत दे सक्ता है?

आप अपने फेसले खूद ले,ना की दुसरो के सहारे जिए, आप् की सोच है,आप मे इश्वर है,आप मे ही खुदा है, आप मे ही रब बस्ता है ।

एक बार हिम्मत तो करो, किसी मासूम कि मदद तो करो, किसी का सहारा तो बनो । ये मत सोचो कि आप अकेले हो,अगर आप सही हो तो पुरी कायनात आप के साथ है, ओर कोइ नही तो उपरवाला तो हमेशा से था ही ।

खुश रहे, सलामत रहे, जय हिंद ।

सबसे सच्चा रिश्ता “दोस्ती” - mahant naik

सबसे सच्चा रिश्ता “दोस्ती” “दोस्त वह होता है जो आपके भुतकाल को समझता है। आपके भविष्य पर विश्वास रखता है और आप जैसे हो ...